धर्ममार्ग

संपूर्ण जीवों का परम निवास है ब्रह्मा:

प्रस्थानत्रयी के अंतर्गत तीन शीर्ष ग्रन्थ आते है, गीता,उपनिषद् एवं ब्रह्मसूत्र। गीता महाभारत का एक अध्याय है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने ज्ञान,भक्ति एवं कर्ममार्ग की व्याख्या की है।
 

धर्ममार्ग- उपनिषद की शिक्षाएं- कन्हैयालाल शर्मा 'निर्मल'

उपनिषद का शाब्दिक अर्थ है गूढ़-विद्या यानी रहस्य अथवा वह विद्या जो केवल दीक्षित-शिष्यों को एकांत में दी जाती है और इसका पूरा ध्यान रखा जाता है कि वह किसी अनधिकारी को न दी जाए। उसी समय से यह शब्द शास्त्र के लिए भी प्रस्तुत होने लगा।

अंतःकरण की शक्तियां

एक समय था जब मनुष्य भी देवता थे।लेकिन वे अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने लगे । सभी देवता परेशान होकर परमपिता के पास गये और निवेदन किया कि मनुष्य कि इन शक्तियों को छीन कर कहीं छुपा दिया जाय । देवताओं ने सुझाव दिया कि इन शक्तियों को क

वीणावादिनी की आराधना का दिवस

रूपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवति देहि मे। धर्म देहि,धनं देहि सर्व विद्या प्रदेहि मे॥
  

विद्या की देवी मॉ सरस्वती

वीणा वादिनि सरस्वती विद्या की देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। ज्ञान-विज्ञान, कला, बुद्धि, मेधा, धारणा की अधिष्ठात्री शक्ति के रूप में भगवती सरस्वती की अर्चना की जाती है। आचार्य व्याडि के प्रसिद्ध कोष में वर्णित है कि श्री शब्द लक

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