धर्ममार्ग

ध्यान साधना

मानव जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए एकाग्रचित्त कर्मरत रहना अनिवार्य है। हर किसी को कार्य में अपनी आवश्यकताओं को पूर्ण करने की संतुष्टि का मार्ग तलाशना पड़ता है। कार्य सिद्धि को ही अपनी पूजा समझने वाले सफलता पाते है। कहा जाता ह

धर्म एवं अध्यात्म

धारयते इति:धर्म: जो धारण किया जाए वह धर्म है अर्थात जिस परमसत्ता के बनाए नियमों के अनुरूप इस जगत का धारण पोषण हो रहा हो और उसके अनुशासनों के अनुरूप अपनी जीवनचर्या का निर्धारण हो रहा हो उसे धर्माचरण कहते है।

जीवन का उद्देश्य

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन केउद्देश्य और उसके प्रति दृष्टिकोण में भिन्नता होती है। एक व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य धनार्जन के लिए संघर्ष करना है वहीं दूसरे व्यक्ति का उद्देश्य यश और प्रतिष्ठा को प्राप्त करना है। लाखों व्यक्ति ऐस

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