खुशवंत सिंह

सांप्रदायिक जहर

पिछले दो-एक महीने में तीन भारतीय उपन्यासकारों ने एक ही विषय पर अत्यधिक पढ़ी जाने वाली कृतियां प्रस्तुत की है। यह विषय है- अपने वतन में सांप्रदायिकता का जहर। एक तो बिहारी तबीश खैर हैं, जो डेनमार्क में बसे है। उनका उपन्यास 'फिल्मिं

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