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आप बन सकते हैं और अच्छे पापा

बदलते परिवेश में पिता की भूमिका भी बदलती जा रही है। एक वक्त था कि घर में बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी केवल माँ पर ही होती थी। यह बात आज भी काफी हद तक सही है, पर इस सच का एक पहलू यह भी है कि इन दिनों पिता अपने बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई में दिलचस्पी लेने लगे है। अतीत में वे बच्चों के साथ घुलते-मिलते नहीं थे, पर आज वे न्यूज व क्रिकेट देखने के अलावा बच्चों के साथ उनकी इच्छा का ख्याल कर कार्टून चैनल भी देख लेते है। यही नहीं वे बच्चों के होम वर्क का भी निरीक्षण करते है। फिर भी अनेक ऐसे पिता है, जो बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे है। यह बात अच्छी नहीं है। कुछ बातें जिन पर अमल कर आप पहले से कहीं बेहतर रूप में पिता की भूमिका निभा सकते है। 

   बच्चों के लिए वक्त निकालें 
   बच्चों की अलमारी को सिर्फ खिलौनों या डिजायनर वस्त्रों से भर देने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप उनके साथ कुछ वक्त बिताएं। आपका बच्चे के साथ रिश्ता तभी मजबूत होगा, जब आप उसके साथ वक्त बिताएंगे। भले ही यह समय 15 से 20 मिनट के बीच ही हो। इस दौरान आप साथ-साथ इंडोर गेम्स खेल सकते है या आप दोनों किसी हॉबी में अपना समय बिता सकते है।
   शालीनता से पेश आएं
   बच्चों के साथ शालीनता से बात करे। उम्र में छोटा समझकर उनका सम्मान क्या करना? इस मानसिकता से उबरे। याद रखें, जब आप बच्चों का सम्मान करेगे, तभी बच्चे आपका सम्मान करना सीखेंगे। जब बच्चे कोई बात कहे तो उनकी बातों को गौर से सुनें। उनकी बात के बीच में बेवजह हस्तक्षेप न करे। उन्हे कुछ मामलों में निर्णय लेने की छूट दें।
   प्रेम प्रकट करे
   बच्चों के समक्ष प्रेम को विभिन्न तरह से प्रकट करना जरूरी है। आप सिर्फ उनकी सुख-सुविधा का ही ध्यान रखें और उनके सामने प्रेम का प्रकटीकरण न करे तो बाल-बुद्धि में यह बात कैसे बैठेगी कि उनके पापा उनसे बेहद प्यार करते है। इसके लिए दिन में जब भी मौका मिले तो बच्चों को गले से लगाएं। उन्हे दुलराएं या उनकी पीठ थपथपाएं। इससे बच्चे को यह अहसास होगा कि उनके पिता उन्हे बहुत प्यार करते है। इससे आपके और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता और मजबूत होगा। नजीजतन बच्चा और अनुशासित रहेगा। साथ ही उसका आपके प्रति सम्मान बढ़ेगा।
   बच्चे की माँ का सम्मान जरूरी
   पिता को अपने बच्चे की माँ का बी सम्मान करना चाहिए। इससे बच्चे के मन में छाप पड़ेगी कि पिता उसकी माँ का कितना सम्मान करते है। इसलिए मुझे भी माँ का सम्मान करना चाहिए। इसके बावजूद यदि आपके और पत्नी के बीच कभी मतभेद होते है तो उन्हे सार्थक संवाद के जरिए सुलझाएं। ऐसा करने से बच्चे के दिलोदिमाग पर एक अच्छा असर पड़ेगा कि यदि आपसी समझदारी से काम लिया जाए तो आपसी मतभेद प्रेम पर हावी नहीं हो सकते। इसके लिए बच्चे के समक्ष पत्नी को कोई अपशब्द न कहे। पत्नी के प्रति आपके अच्छे व्यवहार से बच्चा संबंधों के महत्व को समझने लगता है।
   विवेक शुक्ल