टैट सिंड्रोम : हर समय थकान का एहसास

बदलती जीवनशैली ने मानवजाति को तमाम नये तरह के रोग भी दिए हैं। इस मामले में खास बात यह है कि आम आदमी समझ ही नहींपाता कि वह किस तरह अपनी व्यस्त जीवनशैली के चलते इन रोगों की जकड़ में आ गया है। ऐसा ही एक मामला है टैट सिंड्रोम का यानी टायर्ड ऑल द टाइम, जिसका सीधा-सरल अर्थ होता है हर समय थकान का अनुभव होना। मसलन, आपके भीतर से उत्साह खत्म हो जाए। अनिद्रा या थकान का लगातार अनुभव होना, सोकर उठने के बावजूद अपर्याप्त नींद का अहसास होना सरीखे कुछ लक्षण हैं जो बताते हैं कि आप टैट सिंड्रोम के चंगुल में फँस चुकी हैं। अभी यह शब्द बहुत ज्यादा आम नहींहुआ है, लेकिन इसके चंगुल में फँसने वाले लोगों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। हालिया अध्ययन बताते हैं कि प्रत्येक दस में से एक व्यक्ति टैट सिंड्रोम से पीड़ित है। यही नहींपुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इससे कहींअधिक पीड़ित हो रही हैं। घर-समाज और कार्यक्षेत्र के स्तर पर विभिन्न गतिविधियों में उनकी संलिप्तता संभवत: इसकी प्रमुख वजह है।

   व्यस्त एक्जीक्यूटिव रूबी मजूमदार में जब टैट सिंड्रोम के लक्षण पाए गए तो उनका पहला स्वाभाविक प्रश्न यही था कि घर-परिवार के मोर्चे पर एक साथ जूझ रही महिला के लिए थकान का अनुभव करना असामान्य कैसे है? जवाब देने में उनके डॉक्टर ने बहुत सरल शब्दों का इस्तेमाल किया। डॉक्टर ने कहा, 'इन दिनों जिस तरह की व्यस्त जिंदगी लोग जी रहे हैं, उसमें किसी को भी थकान का अनुभव करना असामान्य नहींहै। हालांकि अच्छी नींद और पर्याप्त आराम के बाद थकान की यह शिकायत दूर हो जाती है, लेकिन कुछ लोगों में अच्छी नींद या आराम भी थकान को दूर नहींकर पाता। उन्हें थकान का अनुभव हर समय बना रहता है तब वह टैट सिंड्रोम का शिकार कहे जाते हैं।' 

   डॉक्टर की सलाह पर रूबी ने लॉग बुक बनानी शुरू की। इसमें वह अपनी दैनिक गतिविधियों से जुड़े सारे काम लिखती थी और उन कामों का खासतौर पर उल्लेख करती थी, जो उसे थकान का अनुभव देते थे। इस लॉग बुक का बारीक अध्ययन करने के बाद पता चला कि रूबी की थकान के लिए घर-ऑफिस से जुड़े कामों के बजाय अत्यधिक सामाजिकता कहीं अधिक जिम्मेदार है। नतीजतन डॉक्टर की सलाह पर रूबी ने सामाजिकता कम करने का निर्णय किया और कुछ समय बाद वह टैट सिंड्रोम से मुक्त हो तरोताजा महसूस करने लगी थी। 

   सीएफएस है मूल में 

   चिकित्सकीय शब्द विज्ञान में टैट सिंड्रोम कोई नया शब्द नहींहै। कुछ वर्ष पहले सीएफएस भी चर्चा में आया था। इसमें थकान के मारे लोगों का बिस्तर से उठने तक का मन नहींकरता था। कुछेक को तो मांसपेशियों में दर्द-कमजोरी, सिरदर्द और बुखार की शिकायत हमेशा बनी रहती थी। इसका सबसे दुखद पहलू यही था कि लोग बगैर इसका कारण जाने वर्र्षो इससे पीड़ित रहते थे। उस वक्त चिकित्सकों ने थकान के अनुभव और उसके छह माह तक लगातार जारी रहने को सीएफएस करार दिया था। इसी का ही कम प्रभाव आज टैट सिंड्रोम के नामकरण से नवाजा गया है। 

   रहस्यमय लक्षण 

   अटलांटा स्थित सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की निदेशक डॉ. जूली गारबर्रि्डग के मुताबिक, 'यह बीमारी रहस्यों के आवरण में घिरी रही। डॉक्टरों ने इसे बीमारी की तरह ले चिकित्सकीय सलाह देनी शुरू कर दी थी। यह अलग बात है कि टैट सिंड्रोम के वास्तविक कारणों को निरूपित नहींकिया जा सका। इसके लिए तमाम कारणों को जिम्मेदार माना जाता था, मसलन शारीरिक, भावनात्मक, जीवनशैली या खानपान से जुड़ी बातें इसके लिए जिम्मेदार मानी गई। हालिया बीमारियों, गर्भावस्था या स्तनपान भी इसके कारणों में शुमार किए गए। साथ ही घर बदलना, पारिवारिक या कार्यगत समस्याओं सरीखे तनाव और दबाव बढ़ाने वाले कारणों को भी एक मुख्य कारण माना गया।' 

   शारीरिक बदलाव 

   मोटापे सरीखे शारीरिक बदलाव को भी थकान का जिम्मेदार माना गया। एनीमिया, थायरायड व हृदय से जुड़ी तमाम बीमारियों में भी व्यक्ति थका-थका महसूस करता है। साथ ही अनिद्रा या खर्राटेदार नींद भी इसकी जिम्मेदार मानी गई। भावनात्मक स्तर पर तनाव और चिंता से भी थकान पनपती है। किसी स्थिति पर नियंत्रण स्थापित न होने या नाकाम होने से जो कुंठा और चिड़चिड़ापन पनपता है वह टैट सिंड्रोम में ही आता है। 

   भावनात्मक बदलाव 

   सिडनी के वूलकॉक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडीसिन के डॉ. नेट मार्शल के मुताबिक टैट सिंड्रोम का संबंध तनाव और दबाव से है। लोगों में पनपी चूहा दौड़ की मानसिकता के आधार पर डॉ. मार्शल ने टैट सिद्धांत तैयार किया। उन्होंने कहा, 'लोगों से सामान्य से अधिक अपेक्षा रखी जाती है। आर्थिक स्तर पर ज्यादा से ज्यादा कमाने का भूत अधिकांश लोगों के सिर पर सवार है। मैंने ऐसे-ऐसे लोगों को देखा है जिन्होंने तीन-तीन साल तक बगैर किसी छुट्टी के काम किया। ऐसे लोग नौकरी छूट जाने या दूसरों के आगे निकल जाने के भय से दिन-रात काम करते रहते हैं। वे इस फेर में जिस तनाव को पाल बैठते हैं वह भी टैट सिंड्रोम का एक प्रमुख कारण है।' 

   नींद की कमी 

   असामान्य या अव्यवस्थित नींद टैट सिंड्रोम से पीड़ित शख्स की समस्या बढ़ाने का काम करती है। अपर्याप्त नींद थकान का एक प्रमुख कारण होता है। सच तो यह है कि कुछ डॉक्टर नींद की अपर्याप्त मात्रा को थकान का ही प्रमुख कारण मानते हैं। वे मानते हैं कि कम से कम आठ घंटे की अच्छी और गहरी नींद बहुत जरूरी है। बिस्तर पर करवटें बदलने से कहींबेहतर होता है कि एक-दो घंटे कम किंतु अच्छी-गहरी नींद ली जाए। इसके लिए जरूरी होगा कि आप अपनी जीवनशैली में बदलाव ला टैट सिंड्रोम से बचें अन्यथा बगैर आपको बताए यह आपके जीवन में प्रवेश कर सब कुछ तहस-नहस कर देगा। बेहतर होगा यदि तमाम उपायों के बावजूद स्थिति में सुधार नहींआए तो छुट्टी ले नियमित दिनचर्या से दूर चली जाएं और तन-मन को सुकून और आराम दे तरोताजगी हासिल करें। 

   कारण टैट के 

   खानपान से जुड़े पहलू
   मसलन पर्याप्त मात्रा में पानी नहींपीना, कम प्रोटीन लेना, कम या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट सेवन, कैफीन पर निर्भरता, अनिश्चित खानपान और संतुलित भोजन का अभाव।
   आरामतलब जीवनशैली
   पसीना बहाना वास्तव में ऊर्जा स्तर में वृद्धि लाने का काम करता है। शारीरिक गतिविधियों से शरीर किसी काम को आसानी से करने लायक बनता है।
   अनिद्रा और लापरवाही
   किसी भी अन्य कारण की तुलना में नींद में कमी थकान को जन्म देती है। अधिक से अधिक नींद लेने के लिए सप्ताह में कम से कम तीन बार बीस-बीस मिनट के लिए व्यायाम करें। जिन दिनों आप वास्तव में बहुत थकान का अनुभव कर रही हों, उस दिन शरीर को आराम देने के लिए कुछ आसान स्ट्रेच करें व शरीर के रक्त संचार को सुचारु करें।
   अत्यधिक तनाव
   तनाव भारीपन लाता है, जिससे आप जागते रहते हैं। तनाव शारीरिक ऊर्जा छीन मानसिक शांति भी भंग करता है।
   इसके लक्षण 

   महज थकान का अनुभव करना ही टैट के लक्षण नहींहैं। इसके अलावा अन्य लक्षण भी टैट सिंड्रोम के जिम्मेदार होते हैं। वे हैं- 

   * ऊर्जा स्तर में कमी का अनुभव
   * लंबे समय तक भारीपन का अनुभव
   * दिन भर पलकें भारी रहना यानी नींद का अनुभव करना
   * मोटीवेशन की कमी
   * एकाग्रचित्त होने में दिक्कत
   * निर्णय करने में कठिनाई
   * दैनिक कार्र्यो को अंजाम देने में कठिनाई
   * बगैर किसी कारण निराशा का अनुभव  निपटने की रणनीति 

   अपनी दिनचर्या में कुछ-एक बदलाव ला टैट सिंड्रोम से बचाव के क्रम में आप अच्छी प्रगति कर सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक- 

   * थकान का अनुभव कराने वाली चीजों को बंद कर दें या कम से कम करें। एक-दो सप्ताह तक आप जो भी काम करें उसे कहींलिखती जाएं। इसमें जिन कामों के बाद आप वास्तव में थकान ज्यादा अनुभव करती है उसे भी लिखना न भूलें। फिर इस लिस्ट पर निगाह डाल तय करें कि किन कामों से आपको थकान होती है। पेशेवर थेरेपिस्ट आपकी दिनचर्या का आकलन कर ऊर्जा बचाने के लिए आवश्यक टिप्स मुहैया करा देंगे। 

   * नियमित व्यायाम से ऊर्जा स्तर में तो वृद्धि होती ही है। साथ ही शरीर में दर्द की अनुभूति भी कम होती है। हालांकि व्यायाम शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से राय लेना न भूलें। कारण अत्यधिक व्यायाम भी थकान का एक प्रमुख कारण होता है। 

   * ध्यान भी कई तरह से राहत देने का काम करता है। यह ऊर्जा में संतुलन लाता है। दिमाग को शांति प्रदान कर यह शरीर को भी हल्का बनाता है। रोजाना सिर्फ 10 मिनट का व्यायाम अधिकांश समस्याओं को हर सकता है। अगर आप प्राणायाम को भी शामिल कर सकींतो जादुई प्रभाव देखने में आएंगे। 

   * अधिकांश लोगों को लगता है कि सहायक या वैकल्पिक चिकित्सा मसलन मालिश, एक्यूपंचर, कीरोप्रेक्टि्स से देखभाल, योग, स्ट्रेचिंग या आत्म सम्मोहन से उन्हें आराम मिलता है। इस संदर्भ में ध्यान रखें कि ये समस्या को कहींअधिक जटिल बना आपको और भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। अत: बेहतर रहेगा कि इन्हें अपनाने से पूर्व डॉक्टर की राय अवश्य ले लें।

   मीता सक्सेना