जागरण's blog

धर्म एवं अध्यात्म

धारयते इति:धर्म: जो धारण किया जाए वह धर्म है अर्थात जिस परमसत्ता के बनाए नियमों के अनुरूप इस जगत का धारण पोषण हो रहा हो और उसके अनुशासनों के अनुरूप अपनी जीवनचर्या का निर्धारण हो रहा हो उसे धर्माचरण कहते है।

सांप्रदायिक जहर

पिछले दो-एक महीने में तीन भारतीय उपन्यासकारों ने एक ही विषय पर अत्यधिक पढ़ी जाने वाली कृतियां प्रस्तुत की है। यह विषय है- अपने वतन में सांप्रदायिकता का जहर। एक तो बिहारी तबीश खैर हैं, जो डेनमार्क में बसे है। उनका उपन्यास 'फिल्मिं

योग पर व्यर्थ का अभियोग

ब्रिटेन में योग पर चर्च के प्रतिबंध को अतार्किक बता रहे है हृदयनारायण दीक्षित

खतरनाक फैसले

अमेरिकापरस्त होने के आरोपों का जवाब देने के लिए केंद्र सरकार मुस्लिम समुदाय के संदर्भ में एक के बाद एक जो फैसले ले रही है वे उसकी अल्पसंख्यकपरस्ती का ही परिचायक बन गए हैं। सच्चर समिति की सिफारिशों को अपने स्तर पर लागू करने के बाद

चीन की भारत विरोधी चाल

एशिया के आर्थिक और सामरिक मामलों पर जब भी कोई शोध या रिपोर्ट प्रकाशित होती है या किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोई बौद्धिक परिचर्चा होती है तो भारत और चीन अक्सर केंद्रीय विषय का हिस्सा होते है। इन चर्चाओं में अधिकांशत: एक विरोधाभास

जीवन का उद्देश्य

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन केउद्देश्य और उसके प्रति दृष्टिकोण में भिन्नता होती है। एक व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य धनार्जन के लिए संघर्ष करना है वहीं दूसरे व्यक्ति का उद्देश्य यश और प्रतिष्ठा को प्राप्त करना है। लाखों व्यक्ति ऐस

हनीफ प्रकरण

हनीफ प्रकरण -  अवधेश कुमार

जंग की शक्ल में जेहाद

जेहाद के नाम पर बढ़ रहे आतंकवाद को तीसरे विश्व युद्ध के रूप में परिभाषित कर रहे हैं हृदयनारायण दीक्षित 

हिंदुत्व पर बेवजह बहस

सेकुलरिज्म के नाम पर हिंदुत्व को कट्टरता से जोड़ने को अनुचित ठहरा रहे है हृदयनारायण दीक्षित 

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