जागरण's blog

सुनामी को थाम लेता है रामसेतु

 इसे विचित्र संयोग ही कहेंगे। रामसेतु बचाने के लिए देश भर में चला आंदोलन बुधवार के दिन में सबसे बड़ी खबर बना। शाम होते-होते दूसरी खबर ने बड़ी खबर का रूप धर लिया। इंडोनेशिया में भयावह भूकंप। इसके बाद भारतीय गृह मंत्रालय का रेड अलर्

सरकार को फिर आई संस्कृत की याद

 रोजमर्रा की जिंदगी में तमाम तरह के तनावों व कई बीमारियों से निजात पाने के लिए लोगों के योग शिक्षा की तरफ भागता देख सरकार को फिर संस्कृत की याद आई है। वजह-योग दर्शन की सारी जानकारी संस्कृत साहित्य में ही ह

मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा

वेद वैश्विक ज्ञान गंगा के उत्स (स्रोत) है। अखण्ड, अनंत, अपरिमित ज्ञान का वह बोध, जिसको तपस्वी मनीषियों द्वारा हृदयंगम किया गया वेद कहलाए। इसलिए वेद अलौकिक है और विराट सत्ता के प्रकाश का ्रद्योतक है। ईश्वर का प्रकाश कभी विभक्त नही

स्वस्ति वाचन का विज्ञान:विज्ञानसम्मत रही है मनीषियों की हर पहल

हमारे देश की यह प्राचीन परंपरा रही है कि जब कभी भी हम कोई कार्य प्रारंभ करते है, तो उस समय मंगल की कामना करते है और सबसे पहले मंगल मूर्ति गणेश की अभ्यर्थना करते है। इसके लिए दो नाम हमारे सामने आते हैं-पहला श्रीगणेश और दूसरा जय गणेश।<

परम पावन व्रत हरितालिका तीज

हरितालिका व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला स्त्रियों का प्रमुख पर्व है। यह व्रत नारी के सौभाग्य की रक्षा करता है।

शरीफ का आना-जाना

परवेज मुशर्रफ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि तानाशाही उनके स्वभाव में है और वह लोकतंत्र को कुचलने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जिस तरह कुछ ही घंटों के अंदर जबरन सऊदी अरब भेज दिया उससे इसकी

स्मरण:आचार्य विनोबा भावे

विन्या, विनोबा, नरहरि भावे, विनायक और बाद में बाबा के नाम से विख्यात आचार्य विनोबा भावे भारतीय संस्कृति के उन्नायक थे। उन्होंने अपनी माता रघुमाई देवी के सुझाव पर गीता का मराठी अनुवाद तैयार किया। मां से ब्रह्मचर्य की महत्ता जब सु

परमाणु करार:वाम दलों की अंध दृष्टि

भारतीय कम्युनिस्टों के बारे में ऐतिहासिक अनुभव यह है कि जब वे देशहित की बात करतें है तब वे वास्तव में देश को क्षति पहुंचाते नजर आते है, जब वे अर्थव्यवस्था या आम आदमी की स्थिति पर चिंता जताते है तब उसे और दरिद्र व असहाय बनाने का प्र

झूठ की सनसनीखेज कहानी

 टेलीविजन मीडिया के अति सक्रियतावाद को अनावश्यक बता रहे हैं बलबीर पुंज 

Syndicate content