भारत जीपीएस का अपना संस्करण विकसित करेगा

हैदराबाद। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष जी माधवन नायर ने कहा कि अगले छह सालों में सात उपग्रह प्रक्षेपित कर भारत ग्लोबल पोजिशनिंग प्रणाली का अपना संस्करण विकसित करेगा।
 
   भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएन एसएस) के 2012 तक कामकाजी होने की संभावना है और उसका उपयोग अन्य के अलावा सर्वेक्षण, दूरसंचार परिवहन आपदा क्षेत्रों की पहचान करने और जन सुरक्षा के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उपग्रह कथित भू-स्थैतिक कक्षा से ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा, ताकि ज्यादा सिग्नल फुटपि्रंट मिले और क्षेत्र पर निगाह रखने में कम उपग्रहों की आवश्यकता हो। प्रस्तावित बंडल का पहला उपग्रह 2009 में छोड़े जाने की संभावना है जिसका विकास 1600 करोड़ रुपये से किया गया है।
  
   58वें अंतरराष्ट्रीय खगोलीय कांग्रेस के दौरान एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नायर ने कहा कि भारत के पास मंगल अभियान शुरू करने की क्षमता है लेकिन लाल ग्रह पर अनुसंधान करने के लिए कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षमता मौजूद है। भू-स्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण वाहन का इस्तेमाल मंगल पर 500 किलोग्राम भार भेजने में किया जा सकता है। उन्होंने हालांकि कहा कि मंगल पर मानव अभियान भेजने के लिए बहुत ही शक्तिशाली राकेट प्रणाली की आवश्यकता होगी ताकि अंतरिक्ष यान को ग्रह तक पहुंचाया जा सके।
  
   अंतरिक्ष में मानव भेजने के बारे में उन्होंने कहा कि इसरो मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए एक परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम मंजूरी के लिए मार्च तक सरकार को अपनी रिपोर्ट दाखिल करेंगे। चंद्रयान एक के बारे में उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य पृथ्वी के विकास का मूल हस्ताक्षर हासिल करना, तराई की खोज और खनिज अन्वेषण तथा आधार स्थापित करने की संभावना तलाशना है जो भविष्य में ग्रह अभियानों में इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खगोल कांग्रेस के दौरान उन्होंने सात अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की जिसमें अमेरिका, रूस और चीन की एजेंसियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बैठकें ज्यादातर पहले से मौजूद सहयोग की स्थिति समीक्षा जैसी थीं। एक सवाल के जवाब में नायर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत को अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम स्वावलंबन से विकसित करने का रुतबा हासिल है। उन्होंने कहा कि दुनिया हमारे अंतरिक्ष अनुप्रयोग कार्यक्रम और अन्य की बहुत सराहना करती है और विकसित देशों सहित अन्य इसका नकल करने का प्रयास कर रहे हैं। नायर ने कहा कि अंतरिक्ष की ओर देख रहे ज्यादातर राष्ट्र टेलीमेडिसिन और टेली एजूकेशन के क्षेत्र में भारत की सफलता को दोहराना चाहते हैं। 

   अगले पांच सालों में 60 अभियान शुरू करने की सरकार की घोषणा के बारे में उन्होंने कहा कि उपग्रह निर्माण अभियानों को आउटसोर्स कर इसरो उस लक्ष्य को हासिल करने में सफल होगा। नायर ने कहा कि मौजूदा समय में हम हर साल पांच से छह प्रक्षेपण करते हैं और हम इसे ज्यादा से ज्यादा आउटसोर्सिग से बढ़ा सकते हैं।