लाजवाब है लाजवर्त

कुछ रत्न ऐसे है, जिनका आकर्षण सदियां-दर सदियां बीतने के बाद भी कम नहीं हुआ है। ऐसी ही रत्नों में लाजवर्त का नाम भी शुमार है। गहरे नीले रंग केइस रत्न पर सुनहरी धारियां इसकी आभा व सौंदर्य में चार-चांद लगा देती है। ऐसी मान्यता है कि लगभग 6500 वर्षो से यह लैपिस लजूली अपनी खूबियों से लोगों को आकर्षित करता रहा है। यही नहीं लैपिस लजूली के आभूषणों सौंदर्य के बारे में क्या कहना! तभी दुनियाभर में इसके आभूणणों की अच्छी खासी मांग है।
   नाम का अर्थ
  
   लैपिस लजूली शब्द में लैपिस शब्द लैटिन भाषा का है। लैटिन भाषा में इस शब्द का अर्थ-स्टोन यानी रत्न से है। वहीं लजूली शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द अजुला से हुई है, जिसका अर्थ नीले रंग से संबंधित है।
  
   इतिहास
  
   दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं के क्षेत्रों में हुई खुदाई और इसके बाद अन्य पुरातात्विक शोधों से यह प्रमाणित हुआ है कि लैपिस लजूली का इतिहास ईसा पूर्व हजारों साल पुराना है। प्राचीन मिस्र के शाही घरानों के सदस्यों के बीच यह रत्न खासा लोकप्रिय रहा था। असीरियन और बेबोलियन सभ्यताओं के लोगल आभूषणों के अलावा लजूली का प्रयोग मुहर लगाने के लिए भी किया करते थे। मिस्र के नकादा नामक स्थान पर एक पुरातात्विक खोज के दौरान लैपिस लजूली रत्न पाए गए थे। ऐसा माना जाता है कि लैपिस लजूली का प्रयोग मिस्र की चर्चित महारानी क्लियोपैट्रा किया करती थी। इसी तरह अन्य देशों में भी लोग लैपिस लजूली का प्रयोग किया करते थे।
  
  
   विशेष रूप से लाभप्रद
   ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं संगीत, नृत्य और रंगमंच से जुड़ी हैं, उनके लिए लैपिस लजूली विशेष रूप से लाभप्रद माना जाता है। इसके बावजूद यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि यह रत्न पुरुषों के लिए फायदेमंद नहीं है। ऐसी मान्यता है कि जो पुरुष या महिलाएं इस रत्न को धारण करती हैं, वे आशावादी नजरिए से परिपूर्ण हो जाती है। इस रत्न को प्रेम और सद्भावना का प्रतीक रत्न माना जाता है।
  
   औषधीय गुण
   दुनिया के विभिन्न प्राचीन सभ्यता वाले देशों जैसे भारत, चीन समेत यूनान, मिस्र, मैसोपोटामिया -के नागरिक इस रत्न की औषधीय खूबियों से वाकिफ रहे है। ऐसी मान्यता रही है कि लैपिस लजूली रत्न को धारण करने से नेत्रों के संक्रमण से बचाव होता है। नेत्र संक्रमण से बचाव के अलावा कुछ किस्म के बुखारों को दूर करने में भी यह रत्न सहायक माना जाता था। लिवर ौर पेट संबंधी बीमारियों को दूर करने में भी यह रत्न सहायक माना जाता है। मानसिक शांति को बरकरार रखने में भी यह रत्न सहायक है। कुछ रत्न विशेषज्ञों की राय में इस रत्न केधारण करने से परिवार में खुशहाली आती है। इस संदर्भ में एक बात याद रखनी चाहिए कि जो व्यक्ति मधुमेह या फिर मोटापे से ग्रस्त हैं, उन्हे इस रत्न को धारण नहीं करना चाहिए। लजूली व्यक्ति के शारारिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसकी भावनाओं को भी संतुलित रखने में सहायक है। यह रत्न व्यक्ति के दम-खम और उसकी इच्छाशक्ति को मजबूत करने में भी सहायक है। ऐसी भी मान्यता है कि इस रत्न के धारणकर्ता का विभिन्न प्रकार के खतरों से बचाव होता है। यहीं नहीं, यह रत्न वैवाहिक युगल के बीच आपसी गलतफहमियों को दूर करता है। कुछ विशेषज्ञों की ऐसी मान्यता है कि यह रत्न शनि ग्रह की प्रतिकूल स्थिति के प्रभाव से भी सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसी धारणा है कि यह रत्न आपके वैचारिक दृष्टिकोण को विस्तारित करता है।
  
  
   संरचना
   वस्तुत: लैपिस लजूली अपने मूल स्वरूप में एक चट्टान है। इस चट्टान का निर्माण विभिन्न प्रकार केखनिज लवणों से मिलकर हुआ है। फिर भी लैपिस लजूली का प्रमुख अवयव(मेन कंपोनेंट) लैजुराइट है, जो इस रत्न में 25 से 40 फीसदी तक मौजूद होता है। लैजुराइट के अलावा इस रत्न में सिलिकॉन, सोडियम, ऑक्सीजन, सल्फर और क्लोरायड जैसे तत्व पो जाते है। अधिकांश लैपिस लजूली में कैल्साइट(व्हाइट) सोडालाइट(ब्ल्यू)ौर पायराइट(मैटलिक यॅलो) सरीखे तत्व भी पाए जाते हैं।
  
  
   ऐसे करे स्वच्छता
   लैपिस लजूली और इससे निर्मित आभूषणों की साफ-सफाई का पहलू भी महत्वपूर्ण है। इस रत्न की समय-समय पर साफ-सफाई करने पर इसमें निहित ऊर्जा का स्तर अच्छी तरह बरकरार रहता है। वहीं साफ-सफाई करने से रत्न की पुरानी वाली आभा एक बार फिर वापस आ जाती है, साथ ही रत्न में किसी भी तरह की खामियां आने की आशंकाएं भी समाप्त हो जाती है। बहरहाल लैपिस लजूली की साफ-सफाई के संदर्भ में सवाल यह उठता है कि इसकी स्वच्छाता के लिए किस विधि पर अमल किया जाए। कई रत्न विशेषज्ञों का मानना है कि इस रत्न को नमक मिश्रित पानी में धोने से इसकी अशुद्धियां दूर हो जाती है। इसी तरह कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पहले गर्म और फिर ठंडे पानी में अदल-बदल कर इसे साफ करने इसकी अशुद्धियां दूर हो जाती हैं, पर इन विघियों से रत्न को साफ करने से लैपिस की पॉलिश या इसकी चमक के क्षीण होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए अनेक रत्न विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी साफ-सफाई के लिए कुछ अन्य विधियों पर अमल करना चाहिए। ज्यादातर विशेषज्ञों की राय में लैपिस लजूली और अन्य रत्नों को साफ करने का एक उम्दा तरीका यह है कि इन रत्नों को सूर्य की किरणों के बीच एक घंटे तक रख दिया जाए। इसी तरह इन्हे चांदनी में भी एक-दो घंटों तक रखा जा सकता है। इसी तरह किसी फलते-फूलते पौधे के नीचे भी इस रत्न को चंद घंटों तक रखने से इसकी अशुद्धियां दूर हो जाती है। ऐसा करने से पौधे को भी इस रत्न की ऊर्जा प्राप्त होगी।
  
  
   लैपिस लजूली को परफ्यूम्स और धुएं से बचाना चाहिए। इसी तरह इसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों और एक्स रे आदि से भी दूर रखना चाहिए।
   शुचि अग्रवाल