जब करुणानिधि ने की थी राम और रामसेतु की जय

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि अगर अपनी याददाश्त पर थोड़ा जोर डालें तो उन्हें खुद समझ में आ जाएगा कि पहले उनके बोल क्या थे, अब क्या हो गए हैं। मामला भगवान राम और रामसेतु के अस्तित्व का है। उन्हीं के मुख्यमंत्रित्व काल में प्रकाशित सरकारी गजेटियर में रामसेतु और भगवान राम द्वारा इसके निर्माण का उल्लेख किया गया है। इस गजेटियर की भूमिका स्वयं करुणानिधि ने लिखी थी। भूमिका में उन्होंने श्रीराम और रामसेतु की भूरि-भूरि तारीफ की हुई है, इनके अस्तित्व को स्वीकार किया है और इसे सबके लिए अच्छा भी कहा है। बावजूद इसके, करुणानिधि ने बेंगलूर में बुधवार को बयान जारी कर कहा कि वे श्रीराम के अस्तित्व नकारने संबंधी अपनी अवधारणा पर अब भी कायम है। उन्होंने कहा कि श्री राम के बारे में जो कुछ भी कहा है, उससे पीछे हटने का सवाल ही नहीं पैदा होता है। बेंगलूर में ही पुलिस ने करुणा के बयान के बाद उनकी पुत्री सेल्वी के घर हमले व बस अग्निकांड में 22 लोगों को हिरासत में लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने करुणानिधि को फोन करके भरोसा दिलाया कि सेल्वी की पूरी हिफाजत की जाएगी।

   वापस लौटते हैं। चर्चा करते हैं गजेटियर की जिससे करुणानिधि के कल और आज के बयानों में विरोधाभास का खुलासा होता है। तमिलनाडु के रामनाथपुरम् जिले के इस गजेटियर में रामसेतु का विस्तार से उल्लेख है। इसका प्रकाशन वर्ष 1972 में हुआ। उस समय करुणानिधि मुख्यमंत्री थे। गजेटियर के प्राक्कथन में करुणानिधि ने लिखा है- 'यह गजेटियर एक संदर्भग्रंथ साबित होगा, जिससे लोगों को देश की परंपराओं की जानकारी मिलेगी।'
  
   अब चर्चा करते हैं इस सरकारी गजेटियर में लिखी गई बातों की। रामसेतु के बारे में लिखा गया है- 'रामेश्वरम् धनुष के आकार का एक द्वीप है, जिसे राम का धनुष भी कहा जाता है। द्वीप के दोनों सिरों को कोडि कहा जाता है, जिसका अर्थ धनुष का सिरा होता है। धनुषकोडि संस्कृत शब्द धनुष और तमिल शब्द कोडि से मिलकर बना है। धनुषकोडि को सेतु या तटबंध मार्ग भी कहा जाता है। इस स्थान पर श्रीराम ने लंका जाने के लिए पुल का निर्माण किया था।'
  
  
   गजेटियर में आगे लिखा गया है- 'लंका से लौटने के बाद श्रीराम ने अपने धनुष के सिरे से इस पुल को खंडित कर दिया था। धनुषकोडि में स्नान करना बहुत पुण्यदायक माना जाता है क्योंकि यह 'समुद्र संगम' है। यहां बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर का संगम होता है।'
  
  
   इस सरकारी प्रकाशन के अनुसार, 'वाल्मीकि ने अपने महान महाकाव्य रामायण में लिखा है कि श्रीलंका पर से पुष्पक विमान में गुजरते हुए श्रीराम ने सीता को यह स्थान दिखाते हुए कहा था कि महासागर में स्थित यह पवित्र स्थल सेतुबंध के रूप में जगप्रसिद्ध है। तीनों लोकों में उसकी महिमा है। यह बहुत पवित्र है और यहां पापों का नाश होता है। भगवान शिव ने यहीं प्रसन्न होकर मुझे कृतार्थ किया था।'
  
  
   जाहिर सी बात है, जब इस गजेटियर की भूमिका तत्कालीन मुख्यमंत्री करुणानिधि ने लिखी होगी तो उन्हें पूरी तरह भान रहा होगा कि इसमें श्रीराम और रामसेतु के अस्तित्व को प्रमाणित करने वाले तथ्य दिए गए हैं। पर अब जब श्रीराम और रामसेतु को लेकर परीक्षा की असली घड़ी सामने है तो वे इनके अस्तित्व को नकार रहे हैं। फिलहाल करुणानिधि के बयान से भड़के जनाक्रोश के चलते पुलिस को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
  
  
   तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि की पुत्री सेल्वी के घर पर मंगलवार रात को हमला करने और तमिलनाडु रोडवेज की बस जलाने के संबंध में पुलिस ने 22 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस उपायुक्त आलोक कुमार ने बताया कि हिंसा की जांच जारी है। पुलिस आयुक्त अच्युत राव ने कहा कि हमलों के लिए जिम्मेदार संगठन के बारे में अभी पक्की जानकारी नहीं है। बस हमले में मारे गए दोनों यात्रियों की पहचान नहीं हो पाई है।
  
  
   पुलिस हमलों के पीछे कंट्टर हिंदूवादी संगठनों का हाथ मान रही है जो कि भगवान राम के अस्तित्व के प्रति करुणानिधि के विवादास्पद बयान से नाराज हैं। घटना की निंदा करते हुए करुणानिधि ने कहा कि यह हमला 'रामसेवकों' के कल्चर को दर्शाता है। पुलिस ने माना कि सेल्वी के घर से हमलावरों की ओर से छोड़ा गया एक नोट प्राप्त हुआ है। इसमें करुणानिधि के विवादास्पद बयान के सिलसिले में उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई थी। इसमें कहा गया है कि करुणानिधि रावण की तरह व्यवहार कर रहे हैं।