अब रामसेतु पर 'दौड़ेगा' हिंदुत्व का रथ

प्रखर हिंदुत्व पर लौटने की कोशिश कर रही भाजपा को कांग्रेस ने ही मुद्दा थमा दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में सरकार ने राम के अस्तित्व पर प्रश्न खड़े कर भाजपा को रामसेतु पर ही हिंदुत्व का रथ दौड़ाने का मौका दे दिया है। मुख्य विपक्षी दल ने फिलहाल तो इसे लपकते हुए केंद्र सरकार के इस रुख को 'देश की सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता और हिंदू जनमानस की भावनाओं को अपमानित करने का प्रयास' करार देकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
  
   लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने रामसेतु मसले पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सरकार के जवाब पर गंभीर आपत्ति जताई और प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को फोन किया। डा. सिंह के अनुपलब्ध होने पर आडवाणी ने प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू को अपनी चिंताओं से अवगत कराया। इससे पहले भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सरकार के हलफनामे का निर्ममता के साथ पोस्टमार्टम किया। उन्होंने भगवान राम को काल्पनिक पात्र बताए जाने को तुष्टिकरण राजनीति की मिसाल करार दिया।
 भाजपा प्रवक्ता ने तीखी भाषा इस्तेमाल करते हुए पूछा, 'यह क्या बदतमीजी है? अगर आस्थाओं को वैज्ञानिक तर्को की कसौटी पर कसा गया तो फिर अन्य धर्मो के बारे में भी सवाल तो उठेंगे ही।' गैर हिंदू धर्मो की आस्थाओं को भी वैज्ञानिक तर्को पर कसे जाने की चुनौती देकर उन्होंने कहा, 'ऐसे तो अन्य धर्मावलंबियों की मान्यताओं पर भी प्रश्न उठेंगे जो घातक होगा।' प्रसाद ने इस प्रकरण में कांग्रेस को लपेटते हुए कहा, 'पहले माना जा रहा था कि टी.आर. बालू ही रामसेतु तोड़ने पर आमादा है, लेकिन अब संस्कृति मंत्रालय के अधीन एएसआई की तरफ से यह बात आने से साफ है कि पूरी भारत सरकार इस पाप में भागीदार है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी ही संस्कृति मंत्री हैं।'
  
 देश भर में चक्का जाम का ऐलान करने वाली विश्व हिंदू परिषद के महासचिव प्रवीण भाई तोगड़िया भी खूब गरजे। उन्होंने चक्का जाम को जायज ठहराया और कहा कि रामद्रोहियों को सबक सिखाया जाएगा। यहां उल्लेखनीय है कि चक्का जाम का ऐलान तो विहिप ने किया था, लेकिन पूरे देश में भाजपा के प्रदेश से लेकर स्थानीय नेताओं को इसका दायित्व सौंपा गया था। चूंकि, मामला अब ज्यादा तूल पकड़ गया है तो सूत्रों के मुताबिक इस आंदोलन की कमान भाजपा अब अपने हाथ में ले सकती है। वैसे विहिप लगातार यह कह चुकी है कि रामजन्मभूमि आंदोलन की तरह इस आंदोलन की कमान भाजपा को नहीं दी जाएगी। मगर सूत्रों के अनुसार मौजूदा घटनाक्रम के बाद अब आडवाणी इस पूरे आंदोलन की कमान संभाल सकते हैं।