आयुर्वेद: वर्षा ऋतु में बचें त्वचा रोगों से

बरसात के मौसम में हवा में नमी अधिक होती है और पसीना बहना या वाष्पीकरण भी कम होता है। इस ऋतु में त्वचा के अंदर की तैलीय ग्रंथियां भी ज्यादा सक्रिय हो जाती है। इस कारण त्वचा अधिक तैलीय (ऑयली) हो जाती है। इस स्थिति में त्वचा संबंधी बीमारियों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

   सार्थक सुझाव
   बरसात में त्वचा की देखभाल इस प्रकार करे कि त्वचा पर चिपचिपाहट या तैलीय अंश न रहे। इसके लिए दिन में दो-तीन बार किसी माइल्ड साबुन से मुँह धोएं। तैलीय त्वचा पर मुल्तानी मिट्टी का लेप 'फेस मास्क' के रूप में कर सकते है। हर दो-तीन दिनों में फेस-मास्क का प्रयोग लाभप्रद रहता है। बरसात के मौसम में कृत्रिम 'मेक-अप' का प्रयोग न करे, तो अच्छा रहेगा। इस मौसम के प्रमुख त्वचा रोग इस प्रकार है-

   खुजली
   वर्षा ऋतु में प्राय: त्वचा में खुजली होने लगती है। इस ऋतु में त्वचा की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नीम की पत्तियों को उबालकर, ठंडाकर इसके पानी से स्नान करना चाहिए अथवा डिटॉल डालकर स्नान करे। वस्त्रों को प्रतिदिन बदलें। गरी के तेल में कपूर डालकर त्वचा पर लगाएं।

   दाद
   बरसात में प्राय: गीले कपड़े पहने रहने से त्वचा पर 'दाद' हो जाती है। नीम की पत्तियां उबालकर, छानकर और इन्हे ठंडाकर इसके पानी से दाद वाले स्थान को साफ करे। चक्रमर्द के बीजों को गंधक के साथ मक्खन में मिलाकर दाद पर लगाना चाहिए। दाद पर छह भाग नारियल का तेल और एक भाग गंधक को घोंटकर मलहम बनाकर प्रयोग करने से लाभ होता है।

   शीत-पित्त
   शरीर पर गोल-गोल चकत्ते पड़ जाते है और इसमें खुजली होती है। सरसों का तेल लगाने से लाभ होता है। हल्दी चूर्ण और दूब घास पीसकर लगाने से भी फायदा होता है। इसी तरह घी में शुद्ध गेरू पीसकर इसका मलहम लगाने से भी लाभ होता है। वर्षा ऋतु में नीम के साबुन का प्रयोग करना लाभकारी होता है। त्वचा रोग में नमक का प्रयोग कम करना चाहिए। सादा, ताजा, सुपाच्य भोजन करना चाहिए। गंधक रसायन और अन्य औषधियों का प्रयोग चिकित्सक के परामर्श से करे।